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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

दस त्रिपदियाँ

       


      1. 

नहीं पता होता, कल क्या होगा......
आज को उसकी छाया से क्यों नहीं बचा पाते हम.....

यह क्षण भी रिस गया,लो!

            2.

रात का तीसरा पहर
गीता पढ़ लूँ

फांसी के वक़्त सामान्य रहना है!

            3. 
घिर रहा नीला अँधेरा
सिकुड़ती हैं नसें.....

भोर के संगीत से सूरज नहीं उगता!

            4. 

आज वह मेरे पास बैठा
बहुत देर बैठा रहा

पहले सा गुस्सा नहीं आया ; प्यार भी तो नहीं!

            5. 

नागफनी बोई थी बरसों पहले
नादानी थी

काँटों का जंगल बड़ा समझदार है!

            6. 

जितने देखे सारे सपने चूर हो गए
जितने भी थे सारे अपने दूर हो गए

वह जिद्दी अब भी अपनों के सपने जीता है!

            7. 

उसने मणियों को समझा कंकर-पत्थर
लुटाता रहा झोली भर-भर

नीलाम हो गया मणियों के बाज़ार में!

            8. 

इतने दिन से खड़ा हुआ था चौखट पर
आज कहा - भीतर आ जाओ

जब मुझको वापस जाना है!

            9. 

सुगंध ने बाँधा
फिर बाँधा सौगंध ने

आज बंधन टूटने को हैं सभी!

           10. 

हवाओं को डँँस रहे हैं नाग
चाँद को निगल रही है अमावस

माँ, मुझे चंदन बनना है!