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शुक्रवार, 12 मई 2017

प्रार्थना

अब तक निभाया,
आगे भी साथ दो!
साँस टूटे तो,
सिर पर तुम्हारा हाथ हो!!
                            [4/5/2017]

गुरुवार, 11 मई 2017

शहीद की माँ

माँएँ राजनीति नहीं समझतीं,
खोजती हैं उस सुदर्शनधारी को
जिसने काठ की तलवार देकर
चक्रव्यूह में धकेल दिए
उनके जवान बेटे।

24/4/2017

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

रासायनिक बम

दम तोड़ने से पहले सपने नीले पड़ गए थे,
होंठ ऐंठ गए थे सफेद फेन उगलते-उगलते;
अच्छा हुआ, नींद में ही तड़क गई थीं नसें,
दम टूट गया; नींद नहीं टूटी!

जल्लाद! तुम सचमुच कितने दयालु हो!!

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

बारह त्रिपदियाँ


1.

नहीं पता होता, कल क्या होगा......
आज को उसकी छाया से क्यों नहीं बचा पाते हम.....
*
यह क्षण भी रिस गया,लो!

2.

रात का तीसरा पहर
गीता पढ़ लूँ
*
फाँसी के वक़्त सामान्य रहना है!

3.

घिर रहा नीला अँधेरा
सिकुड़ती हैं नसें.....
*
भोर के संगीत से सूरज नहीं उगता!

4.

आज वह मेरे पास बैठा
बहुत देर बैठा रहा
*
पहले सा गुस्सा नहीं आया ; प्यार भी तो नहीं!

5.

नागफनी बोई थी बरसों पहले
नादानी थी
*
बड़ा समझदार है काँटों का जंगल!

6.

जितने देखे सारे सपने चूर हो गए
जितने भी थे सारे अपने दूर हो गए
*
वह जिद्दी अब भी अपनों के सपने जीता है!

7.

कल जिन्होंने अभिनंदन किया था,
आज चीर हरण कर रहे हैं
*
सम्मान सत्ता का होता है, अपमान व्यक्ति का!

8.

क्रोध रिश्तों को ध्वस्त कर देता है
आजकल सभी बड़े क्रोध में हैं
*
दम तोड़ रहे हैं सारे रिश्ते!

9.

उसने मणियों को समझा कंकर-पत्थर
लुटाता रहा झोली भर-भर
*
नीलाम हो गया मणियों के बाज़ार में!

10.

इतने दिन से खड़ा हुआ था चौखट पर
आज कहा - भीतर आ जाओ
*
जब मुझको वापस जाना है!

11.
सुगंध ने बाँधा
फिर बाँधा सौगंध ने
*
आज बंधन टूटने को हैं सभी!

12.

हवाओं को डँस रहे हैं नाग
चाँद को निगल रही है अमावस
*
माँ, मुझे चंदन बनना है!

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

जल ही जीवन

गोमुख से चला तो कितना स्वच्छ था मैं
पुण्य फल का प्रतीक
पवित्रतम
सौभाग्य से परिपूर्ण!

और फिर बीच राह में
वे सब मिले एक के बाद एक
मेरी पहचान मिटाने को आतुर
जाने कितने नाले-पनाले
त्रिशंकु की लार से उपजी कर्मनाशा सरीखे!!

...अब मैं वैतरणी का कुंड हूँ
दुर्भाग्य से दबा
बदबू से भरा
दिव्यता का ऐसा घृणित परिणाम
सोचा न था!!!

आज भी तुम कहते हो
मेरी ही नाभि में है
अपराजेय सुगंध की शाश्वत झील?
                       
3.1. 2017.............................

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

प्रफुल्लता

प्राण की अमराइयों में
प्रीत का कोकिल

बोल उट्ठा ...

बौर रोमों में
उठे हैं खिल


31 मार्च, 2000

रविवार, 21 जुलाई 2013

गलगोड्डा[1]

कई बरस पहले हमारे पुरखे
इस गाँव में ले आए थे
एक विचित्र प्राणी

कहने को चौपाया
पर थीं तीन ही टांगें – तीनों घायल,
चौथी टांग अदृश्य

घिसट घिसट कर चलता
मौके बेमौके सींग और पूँछ चलाता
जोर से डकारता

हमने उसके गले में भ्रष्टाचार की ईंटें बाँध दी हैं
अदृश्य टांग की जगह रोप दिया है ऐरावत का घंटा
अब वह चलता नहीं खड़ा खड़ा हिलता है  






[1] . चंचल पशुओं के गले में बाँधा जाने वाला गति-अवरोधक पत्थर, पाया अथवा खूंटा.



क्षणिक

इंद्र के वज्र सा मेरा अस्तित्व

अभी कौंधा
और
लो, विलीन हो चला

पलक झपकते हो गई प्रलय



शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

मळ्ळीजन्मिंचा (पुनर्जन्म)


 मळ्ळीजन्मिंचा
('पुनर्जन्मका तेलुगु अनुवाद )
हिंदी मूल - डॉ. ऋषभ देव शर्मा       *            तेलुगु अनुवाद - डॉ. भागवतुल हेमलता

మళ్ళీజన్మించా

జరిగిన ఈనాటి ఘటన -సముచిత మనిపించింది
अकादमिक प्रतिभा, नई दिल्ली - 100 059
2012./  INR 250/=
आईएसबीएन : 978-93-80042-59-6.
प्राप्ति स्थान -
 डॉ. ऋषभ देव शर्मा, 208 - ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स, 
गणेश नगर, रामंतापुर, हैदराबाद - 500 013 . 
फोन :  +91 8121435033.
రంగుల నా రేకులన్ని చెల్లా చేదురాయను
చదరిన  ఆ రేకులన్ని -తమ పరిమళ సౌరభాన
అభిషేకించాయి  ఈ -మలయానిల సమగతిని

మరణించీ నేనపుడు -చావనూ లేదు
ఇసుమంత కూడ చెక్కైనా -చెదరానూ లేదు

మరల  నేను  జీవించా -
నీ శ్వాసల లయ గతి లో !


 मळ्ळीजन्मिंचा

जरिगिन ईनाटि घटन -समुचित मनिपिंचिंदि
रंगुल ना रेकुलन्नि चॆल्ला चेदुरायनु
चदरिन  आ रेकुलन्नि -तम परिमळ सौरभान
अभिषेकिंचायि  ई -मलयानिल समगतिनि

मरणिंची नेनपुडु -चावनू लेदु
इसुमंत कूड चॆक्कैना -चॆदरानू लेदु

मरल  नेनु  जीविंचा -
नी श्वासल लय गति लो !


पुनर्जन्म

ठीक ही हुआ
बिखर गईं मेरी पंखुड़ियाँ
नहला गईं हवाओं को
अपनी खुशबू से

मर कर भी
मैं मरा नहीं,
मिटा नहीं

फिर से जी उठा
तुम्हारी साँसों में

 ('प्रेम बना रहे' - पृष्ठ 27)


असमंजसं (असमंजस )


असमंजसं 
('असमंजसका तेलुगु अनुवाद )
हिंदी मूल - डॉ. ऋषभ देव शर्मा       *            तेलुगु अनुवाद - डॉ. भागवतुल हेमलता

అసమంజసం  

 ఇంకొన్ని  ఘడియలు ఆగవా అని 
రాత్రి తో నే 
పట్టుపట్టా

నిమసమైనా
నిలవకుండా 
ఆగమన్నా ఆగకుండా 
अकादमिक प्रतिभा, नई दिल्ली - 100 059
2012./  INR 250/=
आईएसबीएन : 978-93-80042-59-6.
प्राप्ति स्थान -
 डॉ. ऋषभ देव शर्मा, 208 - ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स, 
गणेश नगर, रामंतापुर, हैदराबाद - 500 013 . 
फोन :  +91 8121435033.
కొన్ని ఘడియల  ముందరే 
తను నిష్క్రమించింది !!

 असमंजसं 

 इंकॊन्नि  घडियलु आगवा अनि 
रात्रि तो ने 
पट्टुपट्टा

निमसमैना
निलवकुंडा 
आगमन्ना आगकुंडा 
कॊन्नि घडियल  मुंदरे 
तनु निष्क्रमिंचिंदि !!

असमंजस

मैंने रात से ज़िद की –
ठहर जा
कुछ घड़ी और

और वह चली
गई
बिना ठहरे
कुछ घड़ी पहले

 ('प्रेम बना रहे' - पृष्ठ 15)

बुधवार, 12 सितंबर 2012

जिजीविषा

पंख जल गए, विवश पखेरू फिर भी खिसक रहा है
इच्छाएँ गिर गईं, प्राण पर अब भी सिसक रहा है
देह जूझती है अंतिम रण साँस-साँस तिल-तिल भर
रोम-रोम में धँसा केकड़े का नख कसक रहा है

12/9/2012 : 22-45.

सोमवार, 20 अगस्त 2012

नाभि कुंडं (नाभि कुंड )


नाभि कुंडं
('नाभि कुंड' का तेलुगु अनुवाद )
हिंदी मूल - डॉ. ऋषभ देव शर्मा * तेलुगु अनुवाद - डॉ. भागवतुल हेमलता
अकादमिक प्रतिभा, नई दिल्ली - 100 059
2012./  INR 250/=
आईएसबीएन : 978-93-80042-59-6.
प्राप्ति स्थान -
 डॉ. ऋषभ देव शर्मा, 208 - ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स, 
गणेश नगर, रामंतापुर, हैदराबाद - 500 013 . 
फोन :  +91 8121435033.


पदे,पदे वॆंटाडे
कलनॊक्कटि कांचनु
करवाडिन कुठारान्नि
करमुलतो पट्टि नीवु
नडयाडुतुन्नावु
नलुबाटल कूडलि लो

निनु कांचग कूडारा
नडि बाटन जनालु
धरिंचारु मोमुलपै
प्रेमामीर तॊडुगुलु
चाकलोडि वदनान्नि
तलपिंचे तोडुवुलु

कुरिपिंचरंतलोने
प्रश्नल वाडगळ्ळु
नापै नी अप्रियतकु
प्रमाणालु येमिटनि?

ना अशोक वाटिकलो
बहु दिनालु भारंगा
शोक देवतै नीवु
निवशिंचाल्सो च्चिंदि .

अपुडे अरुदॆंचुताडो राकुमारुडु
रूपं लो अतडेमो वन कुमारुडु

नी चेतिलोनि कुठारान्नि
तन कारान धरिंचि
ना नाभि कुंडान
दागिन अमृत भांडम्
मुलालतो मट्टुपॆट्टॆ
राकुमारुडु
मिन्नु विरिगि मीदपडितॆ
तॆगिपोयिन तरुवुला
नेलकॊरिगिपोयावु अपुडे नुव्वु

कानी कांचे कललु कल्लले कदा !
कालेववि ऎन्नटिकी निजालकि, ऎल्ललु


    నాభి కుండం 


పదే,పదే వెంటాడే 
కలనొక్కటి కాంచను 
కరవాడిన కుఠారాన్ని
కరములతో పట్టి నీవు 
నడయాడుతున్నావు 
నలుబాటల కూడలి లో 


నిను కాంచగ కూడారా 
నడి బాటన జనాలు 
ధరించారు మోములపై 
ప్రేమామీర తొడుగులు 
చాకలోడి వదనాన్ని 
తలపించే తోడువులు 

కురిపించరంతలోనే 
ప్రశ్నల వాడగళ్ళు 
నాపై నీ అప్రియతకు 
ప్రమాణాలు యేమిటని? 

నా అశోక వాటికలో
బహు దినాలు భారంగా 
శోక దేవతై నీవు 
నివశించాల్సో చ్చింది .

అపుడే అరుదెంచుతాడో రాకుమారుడు 
రూపం లో అతడేమో వన కుమారుడు 

నీ చేతిలోని కుఠారాన్ని
తన కారాన ధరించి 
నా నాభి కుండాన
దాగిన అమృత భాండమ్ 
ములాలతో మట్టుపెట్టె 
రాకుమారుడు 
మిన్ను విరిగి మీదపడితె 
తెగిపోయిన తరువులా
నేలకొరిగిపోయావు అపుడే నువ్వు 

కానీ కాంచే కలలు కల్లలే కదా !
కాలేవవి ఎన్నటికీ నిజాలకి, ఎల్లలు


नाभिकुंड

एक सपना
दिखाई देता है मुझे बार–बार :
तुम्हारे हाथों में
थमा दी गई है एक कुल्हाड़ी
बीच बाज़ार में
और
धोबियों के मुखौटे लगाए हुए
बहुत सारे लोग
माँग रहे हैं तुमसे
मेरे प्रति अप्रेम का प्रमाण,
गुज़ारने पड़े थे न तुम्हें
कई दिवस
मेरी अशोक वाटिका में !
तभी आता है कोई
वनवासी राजकुमार,
तुम्हारे हाथ से लेकर कुल्हाड़ी
काट डालता है
मेरी नाभि में छिपे अमृतकुंड की जड़ें;
और तुम –
कटे पेड़ की तरह ढह जाती हो !

पर –
सपने तो सपने होते हैं न !

('प्रेम बना रहे' - पृष्ठ 16)

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

गुडिया-गाय-गुलाम (मैथिली में)


गुडिया-गाय-गुलाम 
('गुडिया-गाय-गुलाम' का मैथिली अनुवाद)
हिंदी मूल - डॉ. ऋषभ देव शर्मा  * मैथिली अनुवाद - अर्पणा दीप्ति   

परसु अहाँ हमरा 
हल्ला कर‍अ वाली गुड़िया बुइझ 
जमीन पर पट‍इक देल्हूँ
आओर पैर सँ रौंदल्हूँ हम कोनो शिकायत नहि कयलहूँ।

काल्हि अहाँ हमरा 
अपन खुँटा परअक गाय बुझि
हमरा पैर में पगहा बांधि देल्हूँ
आओर दुहि देल्हूँ हमरा , हम कोनो शिकायत नहि कयलहूँ।

आई अहाँ हमरा 
अपन हुक्म‍अक गुलाम बुझि
गरम सलाख सँ जी दा‍इग देल्हूँ आओर अखनो चाहैत छी 
हम कोनो शिकायत नहि करु !

न‍इ! 
हम गुड़िया नहि छी
हम गाय नहि   छी 
हम गुलाम नहि  छी !!



परसों तुमने मुझे
चीखने वाली गुड़िया समझकर
जमीन पर पटक दिया
और पैरों से रौंद डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 

कल तुमने मुझे
अपने खूंटे की गाय समझकर
मेरे पैरों में रस्सी बाँध दी
और मेरे थनों को दुह डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 

आज तुमने मुझे
अपने हुक्म का गुलाम समझ कर
गरम सलाख से मेरी जीभ दाग दी है और अब भी चाहते हो
मैं कोई शिकायत न करूँ.

नहीं!
मैं गुड़िया नहीं,
मैं गाय नहीं,
मैं गुलाम नहीं!!
('देहरी', पृष्ठ 1)

सोमवार, 6 अगस्त 2012

Doll, Cow, Slave (गुड़िया, गाय, गुलाम)

Doll - Cow - Slave
( 'गुडिया-गाय-गुलाम' का अंग्रेज़ी अनुवाद )
              हिंदी मूल -  डॉ. ऋषभ देव शर्मा   *  अंग्रेज़ी अनुवाद -  एलिजाबेथ कुरियन 'मोना'

The other day, thinking that
I was a screaming doll, 
You thrashed me on the ground 
And  trampled me under your foot. 
I did not complain.

Yesterday, thinking that
I was a cow tethered to your post,
You pinioned my legs with rope 
And milked me dry. 
I did not complain.

Today, thinking that
I am your bonded slave, 
You burn my tongue with hot iron .
Now also you wish that 
I should not complain.

No! I am not a doll! 
I am not a cow!! 
I am not a slave!!



परसों तुमने मुझे
चीखने वाली गुड़िया समझकर
जमीन पर पटक दिया
और पैरों से रौंद डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 

कल तुमने मुझे
अपने खूंटे की गाय समझकर
मेरे पैरों में रस्सी बाँध दी
और मेरे थनों को दुह डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 

आज तुमने मुझे
अपने हुक्म का गुलाम समझ कर
गरम सलाख से मेरी जीभ दाग दी है और अब भी चाहते हो
मैं कोई शिकायत न करूँ.

नहीं! मैं गुड़िया नहीं,
मैं गाय नहीं,
मैं गुलाम नहीं!!
('देहरी', पृष्ठ 1)

संगममु (संगम)

संगममु
('संगम' का तेलुगु अनुवाद )
              हिंदी मूल -  डॉ. ऋषभ देव शर्मा   * तेलुगु अनुवाद -  डॉ. भागवतुल हेमलता 


पदम पदम कलुपुकुनी 
पद पद पयनिद्दामनी
पालू नीरू 
चंदंगा नेडु मनम कलवालनी 
नीवन्ना  आ समयम  गुरुतुकोस्तुन्नदी
कलिसामाक्षणम मनम गंगा -यमुनलतो 
प्रवहिंचामोक पायगा  मुंदुमुंदु करुगुतू. 

येर्रनी नी पगड़ा कांति 
ना कंठपु नीलम तो 
करिगिन आ  शुभ क्षणान
विस्तरींचिन विनीलाकासम
दिगोच्चिनदी मनलोपलिकि
चेरम  घड़ियन मनमु 
घोषिंचे  समुद्रम लोकि

लोलोतुलु  वेतुकूतू
समुद्रम  लो समसामु
प्रवहिंचे पाय काका 
नीरधि लो नीरय्यामु 
नामम  गोत्रम लेदु 
गात्रम गट्टू लेदु 
इटुचूडू अटुचूडू
एटुचूसिना नीटी मयम 
नीरधि लो नीरू मनम 
नीरय्याम नीरधिलो 

इल्लु लेनी ओल्लु लेनी 
नीरधि ओ नीरू मनम 
नीवु लेवु नेनु लेनु
नीरधि लो नीरू मनम 
नीरधि लो नीरय्याम 

संगम

याद आता है समय 
तुमने कहा जब 
लो, चलो, हम आज मिलते हैं 
दो पानियों जैसे, 


और हम तुम मिल गए 
गंगो-जमन से; 
एक धारा बन गए थे। 

घुल गया 
तुम्हारे गौर वर्ण में 
मेरे कंठ का सारा नीलापन, 
उतर आया 
हमारे भीतर आकाश का विस्तार 
और समा गया 
समुद्र की गहराई में। 

अब हम धारा नहीं रहे थे, 
समुद्र थे – 
पानी ही पानी, 
नाम-गोत्र से हीन पानी; 
न घट, न तट – 
बस पानी ही पानी, 

न देह, न गेह – 
बस पानी ही पानी, 
न तुम, न मैं, 
पानी ही पानी !


प्रेमा ('प्यार')


प्रेमा
 ('प्यार' का तेलुगु अनुवाद )
              हिंदी मूल -  डॉ. ऋषभ देव शर्मा   * तेलुगु अनुवाद -  डॉ. भागवतुल हेमलता 

                                                         

नुसिमे नीलाब्जान्नी, स्पृशिन्चानु नेनु
अनुनयम तो नुलुमुतू, अंदालाघ्रानिंचा
तन रेकुल सोयागम, नलिबिली चेयमंटुन्ना .
नूकलेदु नेडु नेनु नुनुलेता रेक्कालनि.

तोलिसारिगा योचिंचा नीलाब्जपू मानसं
कदिले ना कराललो, कमिले तन रेक्कलु
आ क्षणान तन मनान प्रमोदमो, निर्वेदमो
अंतु पट्टलेदु नाकु अंतरंग भावमु .

तिरिगी
नेनु स्पृशिन्चानु मुग्ध गुंडे लोतुलु
एमो नाकनिपिंचेनु
तनेमो  नाकनिपिंचेनु  ....

तनु  ना मनसु उसुलाडिनट्टु

तन प्रेमा सौरभाना
गालि परिमलिंचिनट्टु


उस दिन मैंने फूल को छुआ
सहलाया और सूँघा,
हर दिन की तरह
उसकी पंखुडियों को नहीं नोंचा।

उस दिन पहली बार मैंने सोचा
फूल को कैसा लगता होगा
जब हम नोंचते हैं 
उसकी एक-एक पंखुड़ी।

तब मैंने फूल को
फिर छुआ
फिर सहलाया
फिर सूँघा...

और मुझे लगा

हवाएं महक उठीं
प्यार की खुशबू से।

   ('प्रेम बना रहे' - पृष्ठ 14)

मेखला कन्यका (नदी)


 मेखला कन्यका 
('नदी' का तेलुगु अनुवाद )

हिंदी मूल -  डॉ. ऋषभ देव शर्मा  * तेलुगु अनुवाद -  डॉ. भागवतुल हेमलता 

                                           

गलगला पारुतु गलिबिली चेस्तु
निंडुतनम तो उरकलु वेस्तु
उद्रेकं तो एगसी पडेटि 
मेखला कन्यका नीवे नीवे. 


चेट्टु चेमलु चील्चुकुनि
कोंडा शिखरलू कूल्चुकुनि
पृथ्वी पुशितमु पेकलिंचे
प्रफुल्ल गमनवु नीवे नीवे.


उल्लासम तो उत्साहम तो
पोंगारेटी पोंकमु तोटी
प्रमोदमंदुतु परवडि त्रोक्के
मुग्ध मुदितवु नीवे नीवे.


कानन भूमुलु, मरुस्थलम्मुलु
दाटुतु उरुकुतु जलनिधि चेंतकु
मदि निंडिन नी कोरिक तीरगा
निंडु प्रेमतो चेरे नीवु .

गलगला पारे मेखलवु .




नदी

तुम नदी
छलछलाती
आवेग में उद्दाम !

चट्टानों को फोड़ दिया
काट दिए पर्वतों के शिखर
तराश दिया
धरती का सीना;
पानी की धार !
उमंग से,
उल्लास से,
आनंद से भरपूर !

फलांगती जंगल
लांघती मरुथल
आ गईं समुद्र तक
समा गईं प्यार से,
हुईं पूर्ण काम !

तुम नदी
आवेग में
छलछलाती उद्दाम ! 

('प्रेम बना रहे' - पृष्ठ 13)

सोमवार, 16 जुलाई 2012

ने वाडिन नेलवंकला ( मै बुझे चाँद सा)

ने वाडिन नेलवंकला 

('मै बुझे चाँद सा' का तेलुगु अनुवाद )

हिंदी मूल -  डॉ. ऋषभ देव शर्मा * तेलुगु अनुवाद -  डॉ. भागवतुल हेमलता 


वाडिन नेलवंकला नेनु
निदुरिंचा निसीधि ओडिलो
प्रलय कालपु प्रणय स्वरम लो 
ओदिगाया  रागरागीनुलु
दूराना तीराना उप्पोंगे सिन्धुजलम लो
चिरु दिव्वेवै नुवु मेल्कांचावु
रवलिंचे  मुरली नादं 
चेदिन्चेनु चीकटि चर्यलु 
सप्त  वर्नाला सुन्दर ध्वनुलु

नर्तींचेनु सप्तस्वरालै
आरिन नेलवंका रूपुना 
मरला चेरे कललु  ओकटोक्कटिगा   

मै बुझे चाँद सा

मै बुझे चाँद सा
अंधेरे में छिपा हुआ बैठा था
सब रागिनियाँ डूब चुकी थीं
प्रलय निशा में 
तभी जगे तुम
दूर सिंधु के जल में झलमल
और बांसुरी ऐसी फूंकी
अन्धकार को फाँ क फाँक में चीर चीर कर
सातों सुर बज उठे
सात रंगों वाले 
बुझे चाँद में एक एक कर
सभी कलाए थिरक उठीं

शनिवार, 23 जून 2012

प्रेम बना रहे : ऋषभ देव शर्मा की 68 प्रेम कविताएँ



प्रेम बना रहे : ऋषभ देव शर्मा की 68 प्रेम कविताएँ


अरसे से मन में था कि एक किताब अपनी सहधर्मिणी डॉ. पूर्णिमा शर्मा जी को समर्पित करूँ , पर यह संकोच भी था कि पता नहीं उन्हें कैसा लगे - प्रेम को प्रदर्शित करने में सदा कंजूसी बरतने की अपनी फिलासफी के अनुरूप इसे भी प्रदर्शन और बडबोलापन न मान लें. फिर भी साहस करके गत चार मई 2012 को विवाह की 28वीं वर्षगाँठ पर  बेटे-बेटी से गुपचुप परामर्श करके ''प्रेम बना रहे'' की टंकित पांडुलिपि श्रीमतीजी के सामने धर दी. और सौभाग्यवश उन्होंने न तो रोष जताया और न ही उपहास किया ('प्रेम बना रहे' मेरा तकियाकलाम है न कुछ वर्षों से!). अर्थात प्रकाशन की स्वीकृति मिल गई. और अब वह कविता-संग्रह छप कर आ गया है, प्रकाशित हो गया है.

''प्रेम बना रहे'' में मेरी 68 प्रेम कविताएँ हैं; या कहें कि प्रेम पर केंद्रित कविताएँ हैं. ये कविताएँ अलग अलग समय पर लिखी गई हैं - अलग अलग काव्यरूपों में. यों तो इनमें से कुछ कविताएँ अंतरंग गोष्ठियों में और मित्रों के बीच पसंद की गई हैं, कुछेक यत्र तत्र छपी भी हैं - परंतु अधिकतर ऐसी हैं जो डायरी के पन्नों से पहली बार बाहर आई हैं. अवलोकनार्थ विवरण के अलावा ऑनलाइन संस्करण का लिंक यहाँ सहेज रहा हूँ.

पुस्तक का शीर्षक -   प्रेम बना रहे 
विधा - काव्य [प्रेम कविताएँ]

प्रकाशक -
 अकादमिक प्रतिभा, सरस्वती निवास,
 यू-9, सुभाष पार्क, नज़दीक सोलंकी रोड, उत्तम नगर, 
नई दिल्ली - 100 059.  फोन : +91 9811892244.

प्राप्ति स्थान -
 डॉ. ऋषभ देव शर्मा, 208 - ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स, 
गणेश नगर, रामंतापुर, हैदराबाद - 500 013 . 
फोन :  +91 8121435033.

प्रथम संस्करण : 2012.
पृष्ठ संख्या -120 .
मूल्य - :INR  250/=

आई एस बी एन : 978-93-80042-59-6.

रविवार, 17 जून 2012

खाला का घर



खाला का घर ही
आखिर प्रेम का घर निकला.
बेशर्त उन्मुक्त पंछी सी आवाजाही.
किसी कुर्बानी की माँग नहीं.

चले आओ, पुत्तर, तुम्हारा अपना घर है.
इतना क्यों भटकाया रे कबीरे!
मेरे लाल को?