वह खाली आँखों से मुझे देख रही थी निर्निमेष
पहचानने की कोशिश करती हुई
मैंने अपनी पहचान बताई
वह सुन न सकी,
दोनों कानों के परदे ध्वस्त हो चुके थे
मैं पास जा बैठा सटकर
उसकी उँगलियाँ सहलाईं
गाल छुए
वह वैसे ही देखती रही - कोई पहचान नहीं!
मुझे देख रही थी या मेरे पार; आज तक पता नहीं
मैंने उसकी गोद में सिर रख दिया
दुनिया की सबसे गरम सेज अभी ठंडी नहीं हुई थी!
मैंने धीरे से पुकारा - माँ....
उसकी पुतलियाँ घूमीं - स्मृति लौट रही थी!
उसने होंठ खोले - आवाज़ जा चुकी थी!
कडुआती आँखें मींच लीं मैंने आँसू गटकने को
अहह! उसने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं ;
मैंने आँखें खोलीं - वह मुझे पहचान रही थी!
आँखों में आँखें डाल कर मैंने काँपते स्वर में कहा - माँ, राम राम;
माँ के होंठ फडफडाए- जीभ नहीं उठी
आवाज़ नहीं निकली - पर असीसती उँगलियाँ बोल रही थीं
माँ अंतिम क्षण की प्रतीक्षा में थी
मुझे ट्रेन पकडनी थी!
पहचानने की कोशिश करती हुई
मैंने अपनी पहचान बताई
वह सुन न सकी,
दोनों कानों के परदे ध्वस्त हो चुके थे
मैं पास जा बैठा सटकर
उसकी उँगलियाँ सहलाईं
गाल छुए
वह वैसे ही देखती रही - कोई पहचान नहीं!
मुझे देख रही थी या मेरे पार; आज तक पता नहीं
मैंने उसकी गोद में सिर रख दिया
दुनिया की सबसे गरम सेज अभी ठंडी नहीं हुई थी!
मैंने धीरे से पुकारा - माँ....
उसकी पुतलियाँ घूमीं - स्मृति लौट रही थी!
उसने होंठ खोले - आवाज़ जा चुकी थी!
कडुआती आँखें मींच लीं मैंने आँसू गटकने को
अहह! उसने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं ;
मैंने आँखें खोलीं - वह मुझे पहचान रही थी!
आँखों में आँखें डाल कर मैंने काँपते स्वर में कहा - माँ, राम राम;
माँ के होंठ फडफडाए- जीभ नहीं उठी
आवाज़ नहीं निकली - पर असीसती उँगलियाँ बोल रही थीं
माँ अंतिम क्षण की प्रतीक्षा में थी
मुझे ट्रेन पकडनी थी!
