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रविवार, 20 दिसंबर 2009

गुड़िया-गाय-गुलाम




गुड़िया-गाय-गुलाम


परसों तुमने मुझे
चीखने वाली गुड़िया समझकर
जमीन पर पटक दिया
और पैरों से रौंद डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 0
कल तुमने मुझे
अपने खूंटे की गाय समझकर
मेरे पैरों में रस्सी बाँध दी
और मेरे थनों को दुह डाला पर मैंने कोई शिकायत नहीं की. 0 आज तुमने मुझे
अपने हुक्म का गुलाम समझ कर
गरम सलाख से मेरी जीभ दाग दी है और अब भी चाहते हो
मैं कोई शिकायत न करूँ. 0 नहीं! मैं गुड़िया नहीं,
मैं गाय नहीं,
मैं गुलाम नहीं!! 0

 http://streevimarsh.blogspot.com/2008/08/blog-post_20.html

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