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रविवार, 20 दिसंबर 2009

संक्रांति



प्रतीक्षा है सूर्य के उत्तरायण होने की..
अस्थियों में पैठा मरणान्तक अवसाद तब शायद कुछ पिघले.
अशुभ जो अभी अभी छूकर गुज़र गया .
उसकी छायाओं पर
संक्रांति की शुभ कामना की धूप........


हाँ,
सुबह का इन्तज़ार बेहद ज़रूरी है
हमें भी है.

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